महरौनी (ललितपुर)।

तहसील परिसर में खड़े वर्षों पुराने जर्जर पेड़ अब लोगों की जान के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। इन पेड़ों की कई डालें अंदर से खोखली व कमजोर हो चुकी हैं, जबकि कुछ बड़ी डालें टूटकर पेड़ों पर ही लटकी हुई हैं। ऐसी स्थिति में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
तहसील परिसर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में वादकारी, अधिवक्ता, कर्मचारी और आम नागरिकों का आवागमन रहता है। ऐसे में इन खतरनाक पेड़ों की स्थिति सभी के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। हाल ही में आई तेज आंधी के दौरान एक पीपल के पेड़ की मोटी डाल टूटकर नीचे गिर गई। गनीमत रही कि घटना रात के समय हुई, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। यदि यह हादसा दिन में होता, तो गंभीर परिणाम सामने आ सकते थे।
इसके अलावा परिसर में लगे यूकेलिप्टस के पेड़ों की कई भारी-भरकम डालें आधी टूटकर लटकी हुई हैं, जो किसी भी समय नीचे गिर सकती हैं। इन पेड़ों के नीचे से गुजरने वाले लोग लगातार भय के साए में आने-जाने को मजबूर हैं। बावजूद इसके, अब तक इन खतरनाक डालों को हटाने या पेड़ों की छंटाई के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है।
स्थानीय नागरिकों और कर्मचारियों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन न तो पेड़ों का सर्वे कराया गया है और न ही छंटाई की कोई व्यवस्था की गई है। प्रशासन की यह लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है।
▶️पत्रकार रामजी तिवारी मड़ावरा
▶️संपादक स्वराज भास्कर
▶️खबरों एवं जुड़ने के लिए सम्पर्क करें 👇
▶️9455422423,9695121690








